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10.111.7
सच॑न्त॒ यदु॒षसः॒ सूर्ये॑ण चि॒त्राम॑स्य के॒तवो॒ राम॑विन्दन् । आ यन्नक्ष॑त्रं॒ ददृ॑शे दि॒वो न पुन॑र्य॒तो नकि॑र॒द्धा नु वे॑द ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.111.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जब उषाएं सूर्य से मिलीं, तब इसकी किरणों ने विचित्र शोभा प्राप्त की. आकाश में जब कोई नक्षत्र दिखाई नहीं दिया था, तब सूर्य की सर्वत्रगामी किरणों को कोई नहीं जान पाया. (७)
EN English Translation
When the Usha met the Sun, its rays got a strange splendor. When no nakshatra was visible in the sky, no one could know the all-round rays of the Sun. (7)