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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 114 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 114 • ऋचा / मन्त्र 8

10.114.8

Mantra ID: 10.114.8

स॒ह॒स्र॒धा प॑ञ्चद॒शान्यु॒क्था याव॒द्द्यावा॑पृथि॒वी ताव॒दित्तत् । स॒ह॒स्र॒धा म॑हि॒मानः॑ स॒हस्रं॒ याव॒द्ब्रह्म॒ विष्ठि॑तं॒ ताव॑ती॒ वाक् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.114.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

पंद्रह हजार उक्थमंत्र द्यावा-पृथिवी के समान ही विस्तृत हैं. हमारे स्तोत्रों की महिमा हजारों प्रकार की है. स्तोत्रों के समान वाणी भी असीम है. (८)

EN English Translation

Fifteen thousand ukthamtras are as wide as Dyava-Prithvivi. The glory of our hymns is of thousands of types. Like hymns, the voice is also limitless. (8)

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