Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 115 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 115 • ऋचा / मन्त्र 7

10.115.7

Mantra ID: 10.115.7

ए॒वाग्निर्मर्तैः॑ स॒ह सू॒रिभि॒र्वसुः॑ ष्टवे॒ सह॑सः सू॒नरो॒ नृभिः॑ । मि॒त्रासो॒ न ये सुधि॑ता ऋता॒यवो॒ द्यावो॒ न द्यु॒म्नैर॒भि सन्ति॒ मानु॑षान् ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.115.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शक्ति के पुत्र अग्नि धन पाने के लिए यज्ञकर्म के नेता मनुष्यों एवं विद्वानों द्वारा प्रशंसित होते हैं. मित्रों के समान तृप्त एवं यज्ञ की कामना करने वाले विद्वान्‌ तेजस्वी के समान अपने बलों से शत्रुओं को हराते हैं. (७)

EN English Translation

The leaders of yajnakarma are admired by humans and scholars to get agni wealth, the son of shakti. Scholars who are satisfied like friends and wish for yajna defeat enemies with their forces like Tejaswi. (7)

卐 HinduText AI