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10.126.1
न तमंहो॒ न दु॑रि॒तं देवा॑सो अष्ट॒ मर्त्य॑म् । स॒जोष॑सो॒ यम॑र्य॒मा मि॒त्रो नय॑न्ति॒ वरु॑णो॒ अति॒ द्विषः॑ ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.126.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे देवो! उस पुरुष को कोई भी अमंगल एवं पाप प्राप्त नहीं करता, जिसे अर्यमा, मित्र एवं वरुण मिलकर श्रु के हाथ से बचाते हैं. (१)
EN English Translation
O God! No one receives the evil and sin of that man, whom Aryama, friends and Varuna together save from Shru's hand. (1)