Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 126 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 126 • ऋचा / मन्त्र 8

10.126.8

Mantra ID: 10.126.8

यथा॑ ह॒ त्यद्व॑सवो गौ॒र्यं॑ चित्प॒दि षि॒ताममु॑ञ्चता यजत्राः । ए॒वो ष्व१॒॑स्मन्मु॑ञ्चता॒ व्यंहः॒ प्र ता॑र्यग्ने प्रत॒रं न॒ आयुः॑ ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.126.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यज्ञ करते हुए वसुओं ने पैरों से बंधी हुई गाय को छुड़ा दिया था. हे अग्नि! हमें उसी प्रकार पाप से छुड़ाओ एवं उत्तम तथा विशाल आयु दो. (८)

EN English Translation

While performing the yajna, the vasus had rescued the cow tied to the feet. O agni! In the same way redeem us from sin and give us a better and greater life. (8)

卐 HinduText AI