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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 134 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 134 • ऋचा / मन्त्र 3

10.134.3

Mantra ID: 10.134.3

अव॒ त्या बृ॑ह॒तीरिषो॑ वि॒श्वश्च॑न्द्रा अमित्रहन् । शची॑भिः शक्र धूनु॒हीन्द्र॒ विश्वा॑भिरू॒तिभि॑र्दे॒वी जनि॑त्र्यजीजनद्भ॒द्रा जनि॑त्र्यजीजनत् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.134.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शन्रुनाशक एवं शक्तिशाली इंद्र! तुम अपनी शक्तियों द्वारा सर्वसुखकारी एवं विस्तृत अन्न को हमारी ओर भेजो और सभी साधनों से हमारी रक्षा करो. दिव्य गुणवाली एवं कल्याणमयी माता ने तुम्हें जन्म दिया है. (३)

EN English Translation

O dear and mighty Indra! You send all-pleasing extensive food and your powers to us and protect us by all means. A mother with divine qualities and well-wishing has given birth to you. (3)

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