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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 14 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 14 • ऋचा / मन्त्र 1

10.14.1

Mantra ID: 10.14.1

प॒रे॒यि॒वांसं॑ प्र॒वतो॑ म॒हीरनु॑ ब॒हुभ्यः॒ पन्था॑मनुपस्पशा॒नम् । वै॒व॒स्व॒तं सं॒गम॑नं॒ जना॑नां य॒मं राजा॑नं ह॒विषा॑ दुवस्य ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.14.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमान! तुम पितरों के स्वामी यम की पुरोडाश आदि के द्वारा सेवा करो. यम बहुत से पुण्यकर्म करने वालों को सुख देने वाले स्थानों में ले जाते हैं, बहुतों का मार्ग सरल बनाते हैं एवं सभी मनुष्यों की मंजिल एक है. (१)

EN English Translation

O host! You serve yama, the lord of the fathers, through the purodash, etc. Yama takes many virtuous doers to places of happiness, makes the path of many easier and the destination of all human beings is one. (1)

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