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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 14 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 14 • ऋचा / मन्त्र 5

10.14.5

Mantra ID: 10.14.5

अङ्गि॑रोभि॒रा ग॑हि य॒ज्ञिये॑भि॒र्यम॑ वैरू॒पैरि॒ह मा॑दयस्व । विव॑स्वन्तं हुवे॒ यः पि॒ता ते॒ऽस्मिन्य॒ज्ञे ब॒र्हिष्या नि॒षद्य॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.14.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यम! नानारूप धारी एवं यज्ञकर्ता अंगिराओं के साथ इस यज्ञ में पधारो एवं यजमान को प्रसन्न करो. मैं तुम्हारे पिता विवस्वान्‌ को बुलाता हूं. वे इस यज्ञ में बैठकर यजमान को प्रसन्न करें. (५)

EN English Translation

Oh, Yum! Come to this yajna with the nanarupdhari and the sacrificial angiras and please the host. I call your father, Vivaswan. They sit in this yajna and please the host. (5)

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