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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 14 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 14 • ऋचा / मन्त्र 8

10.14.8

Mantra ID: 10.14.8

सं ग॑च्छस्व पि॒तृभिः॒ सं य॒मेने॑ष्टापू॒र्तेन॑ पर॒मे व्यो॑मन् । हि॒त्वाया॑व॒द्यं पुन॒रस्त॒मेहि॒ सं ग॑च्छस्व त॒न्वा॑ सु॒वर्चाः॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.14.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मेरे पिता! तुम उत्तम स्वर्ग में जाकर अपने पितरों से, यम से और अपने श्रौत, स्मार्त कर्मो के फलों से मिलो. तुम अपना पाप छोड़कर व्रियमान नामक घर में आओ एवं शोभन दीप्ति वाले शरीर से मिलो. (८)

EN English Translation

Oh, my father! You go to the best heaven and meet your fathers, yama and the fruits of your shraut, smarta karma. Leave your sin and come to a house called Vriyana and meet the body of adornment. (8)

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