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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 143 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 143 • ऋचा / मन्त्र 2

10.143.2

Mantra ID: 10.143.2

त्यं चि॒दश्वं॒ न वा॒जिन॑मरे॒णवो॒ यमत्न॑त । दृ॒ळ्हं ग्र॒न्थिं न वि ष्य॑त॒मत्रिं॒ यवि॑ष्ठ॒मा रजः॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.143.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

प्रबल असुरों ने अत्रि ऋषि को शीघ्रगामी घोड़े के समान बांध दिया था. तुमने मजबूत गांठ के समान बंधे अत्रि को खोल दिया था. वे युवक के समान धरती पर गए. (२)

EN English Translation

The strong asuras had tied the sage Atri like a horse. You had opened the atri tied like a strong knot. They went to earth like a young man. (2)

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