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10.151.1
श्र॒द्धया॒ग्निः समि॑ध्यते श्र॒द्धया॑ हूयते ह॒विः । श्र॒द्धां भग॑स्य मू॒र्धनि॒ वच॒सा वे॑दयामसि ॥ (१)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.151.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
श्रद्धा के द्वारा अग्नि प्रज्वलित होते हैं एवं हवि अग्ने में डाला जाता है. श्रद्धा धन के शीश पर स्थित है, यह बात मैं स्तोत्र द्वारा जानता हूं. (१)
EN English Translation
Through reverence, agnis are ignited and inserted into the havi agne. Shraddha is located on the shisha of wealth, this is what I know by hymns. (1)