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10.163.5
मेह॑नाद्वनं॒कर॑णा॒ल्लोम॑भ्यस्ते न॒खेभ्यः॑ । यक्ष्मं॒ सर्व॑स्मादा॒त्मन॒स्तमि॒दं वि वृ॑हामि ते ॥ (५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.163.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे रोगी! मैं तुम्हारी मूत्रेद्रिय, बालों, नाखूनों आदि शरीर के सभी भागों से यक्ष्मा रोग को बाहर निकालता हूं. (५)
EN English Translation
Oh patient! I remove tuberculosis from all parts of your body such as urinary bladder, hair, nails, etc. (5)