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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 20 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 20 • ऋचा / मन्त्र 7

10.20.7

Mantra ID: 10.20.7

य॒ज्ञा॒साहं॒ दुव॑ इषे॒ऽग्निं पूर्व॑स्य॒ शेव॑स्य । अद्रेः॑ सू॒नुमा॒युमा॑हुः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.20.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं उत्कृष्ट सुख की प्राप्ति के लिए अग्नि की सेवा करना चाहता हूं. अग्नि देवों को बुलाने हेतु जाने वाले, पत्थरों के पुत्र व यज्ञ वहन करने वाले हैं. (७)

EN English Translation

I want to serve the agni for the attainment of excellent happiness. Those who go to call the agni gods, the sons of stones and those who bear the yagna. (7)

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