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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 21 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 21 • ऋचा / मन्त्र 6

10.21.6

Mantra ID: 10.21.6

त्वां य॒ज्ञेष्वी॑ळ॒तेऽग्ने॑ प्रय॒त्य॑ध्व॒रे । त्वं वसू॑नि॒ काम्या॒ वि वो॒ मदे॒ विश्वा॑ दधासि दा॒शुषे॒ विव॑क्षसे ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.21.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! यज्ञ आरंभ होने पर एवं हवि समीप आने पर यजमान तुम्हारी प्रार्थना करते हैं. हे महान्‌ अग्नि! तुम हवि देने वाले विमद ऋषि के लिए सभी उत्तम धन देते हो. (६)

EN English Translation

O agni! When the yajna begins and the host comes near, the hosts pray to you. O great agni! You give all the best money to the sage who gives the havi. (6)

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