Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 28 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 5

10.28.5

Mantra ID: 10.28.5

क॒था त॑ ए॒तद॒हमा चि॑केतं॒ गृत्स॑स्य॒ पाक॑स्त॒वसो॑ मनी॒षाम् । त्वं नो॑ वि॒द्वाँ ऋ॑तु॒था वि वो॑चो॒ यमर्धं॑ ते मघवन्क्षे॒म्या धूः ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.28.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

“हे इंद्र! मुझ अल्पबुद्धि में इतनी शक्ति कहां है कि तुझ प्राचीन एवं बुद्धिमान्‌ देव की स्तुति कर सकूं. हे सर्वज्ञ एवं धनस्वामी इंद्र! तुम समयसमय पर हमें बताते हो, इसलिए हम तुम्हारी स्तुति का कुछ भाग सरलता से वहन कर लेते हैं.” (५)

EN English Translation

"O Indra! Where is the power in my little sense to praise your ancient and wise God? O all-knowing and rich indra! You tell us from time to time, so we easily take part of your praise." (5)

卐 HinduText AI