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10.28.7
ए॒वा हि मां त॒वसं॑ ज॒ज्ञुरु॒ग्रं कर्म॑न्कर्म॒न्वृष॑णमिन्द्र दे॒वाः । वधीं॑ वृ॒त्रं वज्रे॑ण मन्दसा॒नोऽप॑ व्र॒जं म॑हि॒ना दा॒शुषे॑ वम् ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.28.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
इंद्रपुत्र वसुक ने कहा-“हे इंद्र! देवगण मुझे तुम्हारे ही समान महान्, प्रत्येक कार्य में शूर एवं अभिलाषापूरक समझते हैं. मैंने प्रसन्नतापूर्वक वज के द्वारा वृत्र का वध किया था. मैंने अपनी महिमा से ही यजमान को गाय का समूह दिया था.” (७)
EN English Translation
Indra's son Vasuk said, "O Indra! The gods consider me to be as great as you, brave and full of desire in every work. I had gladly killed Vritra with a vaj. I gave the host a group of cows out of my glory." (7)