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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 33 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 5

10.33.5

Mantra ID: 10.33.5

यस्य॑ मा ह॒रितो॒ रथे॑ ति॒स्रो वह॑न्ति साधु॒या । स्तवै॑ स॒हस्र॑दक्षिणे ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.33.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब मैं रथ में बैठता था, तब हरे रंग के तीन घोड़े मुझे भली प्रकार ढोते थे. यज्ञ में हजारों स्वर्ण मुद्राएं पाने वाला मैं लोगों द्वारा प्रशंसित होता था. (५)

EN English Translation

When I sat in the chariot, three green horses carried me well. I used to be admired by people who received thousands of gold coins in the yagna. (5)

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