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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 44 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 3

10.44.3

Mantra ID: 10.44.3

एन्द्र॒वाहो॑ नृ॒पतिं॒ वज्र॑बाहुमु॒ग्रमु॒ग्रास॑स्तवि॒षास॑ एनम् । प्रत्व॑क्षसं वृष॒भं स॒त्यशु॑ष्म॒मेम॑स्म॒त्रा स॑ध॒मादो॑ वहन्तु ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.44.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शक्तिशाली, विशाल शरीर वाले एवं परस्पर प्रसन्न रहने वाले इंद्र के घोड़े मनुष्यों के पालक, हाथ में वज्र धारण करने वाले, शक्तिशाली, शत्रु सेनाओं को निर्बल बनाने वाले, अभिलाषापूरक व विवादरहित शक्ति वाले इंद्र को हमारे समीप लावें. (३)

EN English Translation

May indra's horses, who have a powerful, large body, and mutually happy, bring to us indra, the guardian of man, the vajra in his hand, the powerful, the weakest of enemy armies, the one who is full of desire and the power without dispute. (3)

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