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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 44 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 5

10.44.5

Mantra ID: 10.44.5

गम॑न्न॒स्मे वसू॒न्या हि शंसि॑षं स्वा॒शिषं॒ भर॒मा या॑हि सो॒मिनः॑ । त्वमी॑शिषे॒ सास्मिन्ना स॑त्सि ब॒र्हिष्य॑नाधृ॒ष्या तव॒ पात्रा॑णि॒ धर्म॑णा ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.44.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मैं तुम्हारी स्तुति करता हूं, इसलिए सारी संपत्ति मेरे पास आवे. तुम मुझ सोमरस वाले के शोभन यज्ञ में आओ. तुम धन के स्वामी हो. तुम इन बिछे हुए कुशों पर बैठी. तुम्हारे सोमरस के पात्रों को राक्षस छू भी नहीं सकते. (५)

EN English Translation

O Indra! I praise you, so let all property come to me. You come to me in the Shobhan Yajna of Somras Wale. You are the master of wealth. You sat on these divided cushions. The characters of your Somras can't even touch the monster. (5)

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