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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 49 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 1

10.49.1

Mantra ID: 10.49.1

अ॒हं दां॑ गृण॒ते पूर्व्यं॒ वस्व॒हं ब्रह्म॑ कृणवं॒ मह्यं॒ वर्ध॑नम् । अ॒हं भु॑वं॒ यज॑मानस्य चोदि॒ताय॑ज्वनः साक्षि॒ विश्व॑स्मि॒न्भरे॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.49.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैंने अपने स्तोता को अधिक धन दिया. मैंने अपनी वृद्धि करने वाले यज्ञों का अनुष्ठान किया. मैं अपने यजमान को धन देता हूं तथा यज्ञ न करने वाले सभी को युद्ध में पराजित करता हूं. (१)

EN English Translation

I gave more money to my stota. I performed the rituals of my growing yagnas. I give money to my host and defeat all those who do not perform yajna in battle. (1)

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