Popular:
ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 49 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 8

10.49.8

Mantra ID: 10.49.8

अ॒हं स॑प्त॒हा नहु॑षो॒ नहु॑ष्टरः॒ प्राश्रा॑वयं॒ शव॑सा तु॒र्वशं॒ यदु॑म् । अ॒हं न्य१॒॑न्यं सह॑सा॒ सह॑स्करं॒ नव॒ व्राध॑तो नव॒तिं च॑ वक्षयम् ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 10.49.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं सात शत्रु नगरियों को नष्ट करने वाला व बंधनकर्त्ताओं में श्रेष्ठ हूं. मैंने अपने बल से बुर्वश और यदु को प्रसिद्ध किया. मैंने अपने अन्य स्तोताओं को शक्तिशाली बनाया तथा शत्रुओं की उन्नतिशील निन्यानवे नगरियों को ध्वस्त किया. (८)

EN English Translation

I am the destroyer of seven enemy cities and best of shackler. I made Burvash and Yadu famous with my own strength. I made my other stotas powerful and demolished the ninety-nine progressive cities of the enemies. (8)

卐 HinduText AI