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10.51.2
को मा॑ ददर्श कत॒मः स दे॒वो यो मे॑ त॒न्वो॑ बहु॒धा प॒र्यप॑श्यत् । क्वाह॑ मित्रावरुणा क्षियन्त्य॒ग्नेर्विश्वाः॑ स॒मिधो॑ देव॒यानीः॑ ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.51.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
अग्नि ने उत्तर दिया-“मुझे किसने देखा था? वह कौन सा देव है, जिसने मेरे विविध शरीरों को देखा था? हे मित्र और वरुण! मुझ अग्नि की दीप्त एवं देवयज्ञ साधन देह कहां है? यह बताओ.” (२)
EN English Translation
The agni replied, "Who saw me?" Which god is he who saw my diverse bodies? Hey friend and Varun! Where is the body of my agni and the divine means of agni? Tell me that." (2)