Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
10.51.7
कु॒र्मस्त॒ आयु॑र॒जरं॒ यद॑ग्ने॒ यथा॑ यु॒क्तो जा॑तवेदो॒ न रिष्याः॑ । अथा॑ वहासि सुमन॒स्यमा॑नो भा॒गं दे॒वेभ्यो॑ ह॒विषः॑ सुजात ॥ (७)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 10.51.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
देवों ने कहा-“हे अग्नि! हम तुम्हें जरारहित आयु प्रदान करते हैं. हे जातवेद! इस आयु से युक्त होकर तुम नहीं मरोगे. हे शोभन जन्म वाले अग्नि! तुम प्रसन्नचित्त होकर यजमान द्वारा दिए गए हव्य का भाग देवों के पास ले जाओ.” (७)
EN English Translation
The gods said, "O agni! We give you a lifeless age. O Jathaveda! You won't die of this age. O agni of glory born! Be glad to take the portion of the promise given by the host to the gods." (7)