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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 58 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 1

10.58.1

Mantra ID: 10.58.1

यत्ते॑ य॒मं वै॑वस्व॒तं मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.58.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

विवस्वान्‌ के पुत्र यम के पास, जो दूर रहते हैं, तुम्हारा जो मन गया है, उसे हम लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (१)

EN English Translation

To Yama, the son of Vivasvan, who lives far away, we return what you have believed. You live to inhabit this world. (1)

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