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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 58 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 12

10.58.12

Mantra ID: 10.58.12

यत्ते॑ भू॒तं च॒ भव्यं॑ च॒ मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.58.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सुबंधु! तुम्हारा जो मन किसी दूरवर्ती भू एवं भविष्य स्थान पर गया है, उसे हम वापस बुलाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (१२)

EN English Translation

O brother! We call back the mind that your mind has gone to a distant land and future place. You live to inhabit this world. (12)

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