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10.58.5
यत्ते॑ समु॒द्रम॑र्ण॒वं मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.58.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
तुम्हारा जो मन जल से भरे हुए दूरवर्ती समुद्र के पास गया है, उसे हम वापस लौटाते हैं. तुम इस संसार में निवास करने के लिए जीते हो. (५)
EN English Translation
We return your mind that has gone to the distant sea filled with water. You live to inhabit this world. (5)