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10.69.12
अ॒यम॒ग्निर्व॑ध्र्य॒श्वस्य॑ वृत्र॒हा स॑न॒कात्प्रेद्धो॒ नम॑सोपवा॒क्यः॑ । स नो॒ अजा॑मीँरु॒त वा॒ विजा॑मीन॒भि ति॑ष्ठ॒ शर्ध॑तो वाध्र्यश्व ॥ (१२)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.69.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वभ्रयश्च द्वारा स्थापित वे अग्नि शत्रुहंता, प्राचीन काल से विशेष दीप्त एवं नमस्कार से स्तुतियोग्य हैं. तुम हमारी जाति से बाहर एवं विविध जातियों वाले शत्रुओं को हटाओ. (१२)
EN English Translation
They are praiseworthy of the agni enemy, special lamps and salutations from ancient times, founded by Vabhraish. Remove enemies out of our race and of different races. (12)