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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 69 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 69 • ऋचा / मन्त्र 3

10.69.3

Mantra ID: 10.69.3

यत्ते॒ मनु॒र्यदनी॑कं सुमि॒त्रः स॑मी॒धे अ॑ग्ने॒ तदि॒दं नवी॑यः । स रे॒वच्छो॑च॒ स गिरो॑ जुषस्व॒ स वाजं॑ दर्षि॒ स इ॒ह श्रवो॑ धाः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.69.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! मनु ने जिस प्रकार तुम्हारी किरणों को दीप्त किया था, उसी प्रकार मैं सुमित्र ऋषि भी उन्हें दीप्त करता हूं. तुम्हारी किरणें नवीन हैं. तुम धनसंपन्न होकर जलो, हमारी स्तुतियां स्वीकार करो, शत्रुसेना को मारो एवं हमें अन्न दो. (३)

EN English Translation

O agni! Just as Manu had brightened your rays, so I, the sage Sumitra, also gives them glow. Your rays are new. Burn richly, accept our praises, kill the enemy and give us food. (3)

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