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10.69.7
दी॒र्घत॑न्तुर्बृ॒हदु॑क्षा॒यम॒ग्निः स॒हस्र॑स्तरीः श॒तनी॑थ॒ ऋभ्वा॑ । द्यु॒मान्द्यु॒मत्सु॒ नृभि॑र्मृ॒ज्यमा॑नः सुमि॒त्रेषु॑ दीदयो देव॒यत्सु॑ ॥ (७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.69.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे विशाल स्तुतियों वाले, प्रधान दाता, अनेक प्रकार के हव्यों द्वारा आच्छादित, अनेक आहवनीय द्वारों से लाए गए, अतिशय प्रदीप्त एवं प्रधान पुरोहितों द्वारा अलंकृत अग्नि! तुम देवों की कामना करने वाले सुमित्र एवं उसके परिवार वालों के घरों में प्रज्वलित बनो. (७)
EN English Translation
O great giver, the chief giver, covered by many kinds of havans, brought from many afarious gates, the agni of the most illuminated and ornate by the chief priests! Be lit in the houses of Sumitra and his family who wish for the gods. (7)