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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 83 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 83 • ऋचा / मन्त्र 1

10.83.1

Mantra ID: 10.83.1

यस्ते॑ म॒न्योऽवि॑धद्वज्र सायक॒ सह॒ ओजः॑ पुष्यति॒ विश्व॑मानु॒षक् । सा॒ह्याम॒ दास॒मार्यं॒ त्वया॑ यु॒जा सह॑स्कृतेन॒ सह॑सा॒ सह॑स्वता ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.83.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वज्र के समान सारपूर्ण एवं बाण के समान शत्रुनाशक मन्यु! जो यजमान तुम्हारी पूजा करता है, वह ओज एवं बल धारण करता है एवं संग्राम में सभी शत्रुओं को जीतता है. तुम्हारी सहायता से हम दास और आर्य दो प्रकार के शत्रुओं को हरावें, तुम शक्ति के उत्पादक एवं शक्तिशाली हो. (१)

EN English Translation

O evil as a thunderbolt and as hostile as an arrow! The host who worships you, he holds the power and force and conquers all the enemies in the battle. With your help, let us defeat two kinds of enemies, dasas and Aryans, you are the producers of power and the mighty. (1)

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