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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 98 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 98 • ऋचा / मन्त्र 2

10.98.2

Mantra ID: 10.98.2

आ दे॒वो दू॒तो अ॑जि॒रश्चि॑कि॒त्वान्त्वद्दे॑वापे अ॒भि माम॑गच्छत् । प्र॒ती॒ची॒नः प्रति॒ मामा व॑वृत्स्व॒ दधा॑मि ते द्यु॒मतीं॒ वाच॑मा॒सन् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.98.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे देवापि! कोई ज्ञानी एवं गतिशील देवदूत बनकर तुम्हारे पास से मेरे समीप आवे. हे बृहस्पति! तुम मेरी ओर उन्मुख होकर मेरे पास आओ. मैं तुम्हारे लिए दीप्तियुक्त स्तुति अपने मुख में धारण करता हूं. (२)

EN English Translation

O God! Become a wise and moving angel and come to Me from you. O Jupiter! You come to me with a direction. I hold in my mouth a radiant praise for you. (2)

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