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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 23 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 23 • ऋचा / मन्त्र 5

3.23.5

Mantra ID: 3.23.5

इळा॑मग्ने पुरु॒दंसं॑ स॒निं गोः श॑श्वत्त॒मं हव॑मानाय साध । स्यान्नः॑ सू॒नुस्तन॑यो वि॒जावाग्ने॒ सा ते॑ सुम॒तिर्भू॑त्व॒स्मे ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.23.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! यज्ञ करने वाले मुझ यजमान को सदा अनेकानेक यज्ञकर्मो की साधन रूप गौ प्रदान करो. हे अग्नि! हमें पुत्र एवं पौत्र प्राप्त हों तथा तुम्हारी फलदायक सुबुद्धि हमारे अनुकूल हो. (५)

EN English Translation

O agni! Give me the yajna-doer a cow as a means of many yajnakarmas at all times. O agni! May we have sons and grandsons, and may your fruitful wisdom be compatible with us. (5)

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