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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 43 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 43 • ऋचा / मन्त्र 1

3.43.1

Mantra ID: 3.43.1

आ या॑ह्य॒र्वाङुप॑ वन्धुरे॒ष्ठास्तवेदनु॑ प्र॒दिवः॑ सोम॒पेय॑म् । प्रि॒या सखा॑या॒ वि मु॒चोप॑ ब॒र्हिस्त्वामि॒मे ह॑व्य॒वाहो॑ हवन्ते ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.43.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जुए वाले रथ पर बैठे हुए इंद्र! तुम शीघ्र हमारे पास आओ. यह सोमपान प्राचीनकाल से तुम्हारे निमित्त ही चला आ रहा है. तुम अपने प्यारे घोड़ों को कुश के निकट रथ से खोलो. ये ऋत्विज्‌ तुम्हें सोम पीने के लिए बुलाते हैं. (१)

EN English Translation

O Indra, sitting on a gambling chariot! You come to us soon. This somapan has been running for you since ancient times. You open your beloved horses with a chariot near Kush. These ritwizs call you to drink som. (1)

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