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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 44 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 44 • ऋचा / मन्त्र 5

3.44.5

Mantra ID: 3.44.5

इन्द्रो॑ ह॒र्यन्त॒मर्जु॑नं॒ वज्रं॑ शु॒क्रैर॒भीवृ॑तम् । अपा॑वृणो॒द्धरि॑भि॒रद्रि॑भिः सु॒तमुद्गा हरि॑भिराजत ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.44.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने कमनीय, श्वेत वर्ण, दूध मिले हुए, वेगवान्‌ एवं पत्थरों द्वारा निचोड़े गए सोम को आवरणरहित किया है एवं घोड़ों के साथ मिलकर पणियों द्वारा चुराई गई गाएं गुफा से बाहर निकाली हैं. (५)

EN English Translation

Indra has covered the soma, which is commissible, white, mixed with milk, and squeezed by vegans and stones, and together with horses, he has taken out the cows stolen by the pangs out of the cave. (5)

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