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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 10 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 10 • ऋचा / मन्त्र 8

9.10.8

Mantra ID: 9.10.8

नाभा॒ नाभिं॑ न॒ आ द॑दे॒ चक्षु॑श्चि॒त्सूर्ये॒ सचा॑ । क॒वेरप॑त्य॒मा दु॑हे ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.10.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं नाभि के समान यज्ञ के आधार सोम को अपनी नाभि में धारण करता हूं. हमारी आंखें सूर्य से मिलती हैं. मैं कविरूप सोम की धाराओं को दुहता हूं. (८)

EN English Translation

I hold the som in my navel, the basis of the yajna like the navel. Our eyes meet the sun. I milk the streams of Kavirup Som. (8)

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