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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 103 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 103 • ऋचा / मन्त्र 2

9.103.2

Mantra ID: 9.103.2

परि॒ वारा॑ण्य॒व्यया॒ गोभि॑रञ्जा॒नो अ॑र्षति । त्री ष॒धस्था॑ पुना॒नः कृ॑णुते॒ हरिः॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.103.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

गाय के दूध में मिले हुए सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हैं. हरे रंग वाले सोम शुद्ध होकर तीन स्थानों को अपना बनाते हैं. (२)

EN English Translation

Mon mixed in cow's milk goes to Dashapavitra made of sheep's hair. The green-colored mons become pure and make three places their own. (2)

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