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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 103 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 103 • ऋचा / मन्त्र 6

9.103.6

Mantra ID: 9.103.6

परि॒ सप्ति॒र्न वा॑ज॒युर्दे॒वो दे॒वेभ्यः॑ सु॒तः । व्या॒न॒शिः पव॑मानो॒ वि धा॑वति ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.103.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

घोड़े के समान युद्ध के इच्छुक, दीप्तिशाली, देवों के लिए निचोड़े गए, पात्रों में फैले हुए एवं दशापवित्र द्वारा शुद्ध होते हुए सोम चारों ओर दौड़ते हैं. (६)

EN English Translation

Aspiring to fight like a horse, radiant, squeezed for the gods, spread across characters and purified by the dashapavitra, Soma runs around. (6)

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