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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 114 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 114 • ऋचा / मन्त्र 1

9.114.1

Mantra ID: 9.114.1

य इन्दोः॒ पव॑मान॒स्यानु॒ धामा॒न्यक्र॑मीत् । तमा॑हुः सुप्र॒जा इति॒ यस्ते॑ सो॒मावि॑ध॒न्मन॒ इन्द्रा॑येन्दो॒ परि॑ स्रव ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.114.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

शुद्ध होते हुए सोम के तेज का जो ब्राह्मण अनुगमन करता है, लोग उसे शोभन प्रजा वाला कहते हैं. जो अपना मन सोम के अनुकूल बना लेता है, उसे भी भाग्यशाली कहते हैं. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (१)

EN English Translation

The Brahmin who follows the glory of Som while being clean, people call him Shobhan Praja Wala. The one who makes his mind friendly to Som is also called lucky. Hey Mon! You drip juice to Indra. (1)

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