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9.19.5
कु॒विद्वृ॑ष॒ण्यन्ती॑भ्यः पुना॒नो गर्भ॑मा॒दध॑त् । याः शु॒क्रं दु॑ह॒ते पयः॑ ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.19.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
दूध आदि में मिलाए जाते हुए सोम अभिलाषा करने वाली वसतीवरी के गर्भ के रूप में अपना रस अनेक बार धारण करते हैं. जल दीप्त रस को दुहते हैं. (५)
EN English Translation
Mixed with milk etc., som holds his juice several times as a womb of the wishing vasathivari. Water is milking the luminous juice. (5)