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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 27 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 5

9.27.5

Mantra ID: 9.27.5

ए॒ष सूर्ये॑ण हासते॒ पव॑मानो॒ अधि॒ द्यवि॑ । प॒वित्रे॑ मत्स॒रो मदः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.27.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नशा करने वाले सोम जिस समय निचोड़े जाते हैं, उस समय सूर्य उन्हें द्युलोक में छोड़ते हैं. (५)

EN English Translation

At the time when the intoxicating mons are squeezed, the sun releases them in the dolok. (5)

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