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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 38 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 38 • ऋचा / मन्त्र 5

9.38.5

Mantra ID: 9.38.5

ए॒ष स्य मद्यो॒ रसोऽव॑ चष्टे दि॒वः शिशुः॑ । य इन्दु॒र्वार॒मावि॑शत् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.38.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

स्वर्ग के पुत्र वे सोम मादक रस के रूप में सबको देखते हैं तथा दीप्त सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र में प्रवेश करते हैं. (५)

EN English Translation

Son of heaven, he sees everyone as the som intoxicating rasa and the bright mon enters the dashapavitra made of sheep's hair. (5)

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