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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 39 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 3

9.39.3

Mantra ID: 9.39.3

सु॒त ए॑ति प॒वित्र॒ आ त्विषिं॒ दधा॑न॒ ओज॑सा । वि॒चक्षा॑णो विरो॒चय॑न् ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.39.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दीप्ति धारण करते हुए एवं सबको देखते हुए निचोड़े गए सोम सबको दीप्त बनाते हैं एवं अपनी शक्ति से दशापवित्र पर जाते हैं. (३)

EN English Translation

Wearing a lamp and looking at everyone, the squeezed Monma makes everyone glow and goes to Dashapavitra with his power. (3)

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