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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 41 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 41 • ऋचा / मन्त्र 5

9.41.5

Mantra ID: 9.41.5

स प॑वस्व विचर्षण॒ आ म॒ही रोद॑सी पृण । उ॒षाः सूर्यो॒ न र॒श्मिभिः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.41.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सूर्यदर्शक सोम! तुम नीचे की ओर गिरो एवं उस रस से विस्तृत द्यावा-पृथिवी को इस प्रकार पूर्ण कर दो, जिस प्रकार सूर्य किरणों से दिन को पूर्ण करता है. (५)

EN English Translation

O Suryadarshaka Mon! You fall down and complete the wide dyava-earth with that juice in such a way that the sun completes the day with the rays. (5)

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