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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 6 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 6 • ऋचा / मन्त्र 8

9.6.8

Mantra ID: 9.6.8

आ॒त्मा य॒ज्ञस्य॒ रंह्या॑ सुष्वा॒णः प॑वते सु॒तः । प्र॒त्नं नि पा॑ति॒ काव्य॑म् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.6.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

निचोड़ा हुआ सोमरस यज्ञ की आत्मा है. वह यजमानों की अभिलाषा पूरी करता हुआ जोर से टपकता है एवं प्राचीन काल से प्रसिद्ध अपने क्रांतदर्शीरूप की रक्षा करता है. (८)

EN English Translation

Squeezed somers is the soul of the yagna. He drips loudly, fulfilling the wishes of the hosts and protects his revolutionary form, famous since ancient times. (8)

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