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9.68.2
स रोरु॑वद॒भि पूर्वा॑ अचिक्रददुपा॒रुहः॑ श्र॒थय॑न्स्वादते॒ हरिः॑ । ति॒रः प॒वित्रं॑ परि॒यन्नु॒रु ज्रयो॒ नि शर्या॑णि दधते दे॒व आ वर॑म् ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.68.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
शब्द करके कलश की ओर जाते हुए, स्तोताओं की स्तुतियों को सामने सुनते हुए हरे रंग के सोम ओषधियों को फलयुक्त बनाते हैं, दशापवित्र को पार करके तेजी से बहते हैं, राक्षसों को मारते और यजमानों को वरण करने योग्य धन देते हैं. (२)
EN English Translation
While going towards the kalash by wording, listening to the praises of the psalms, the green soma makes the medicines fruitful, crosses the Dashapavitra and flows fast, kills the demons and gives the hosts a selectable wealth. (2)