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9.72.3
अर॑ममाणो॒ अत्ये॑ति॒ गा अ॒भि सूर्य॑स्य प्रि॒यं दु॑हि॒तुस्ति॒रो रव॑म् । अन्व॑स्मै॒ जोष॑मभरद्विनंगृ॒सः सं द्व॒यीभिः॒ स्वसृ॑भिः क्षेति जा॒मिभिः॑ ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.72.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
देवों को प्रसन्न करने के लिए पात्रों में प्रवेश करने वाले सोम गोदुग्ध आदि को लक्ष्य करते हैं. वे सूर्य की प्रिय पुत्री उषा के स्वर का तिरस्कार करते हैं. स्तोता सोम की पर्याप्त स्तुति करता है. सोम दोनों भुजाओं से उत्पन्न एवं परस्पर मिली हुई गतिशील उंगलियों से मिलते हैं. (३)
EN English Translation
To please the gods, the mons who enter the characters target godoudha etc. They despise the tone of The Sun's beloved daughter Usha. The stota praises Som enough. Mons meet the moving fingers arising from both the arms and joined together. (3)