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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 72 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 72 • ऋचा / मन्त्र 5

9.72.5

Mantra ID: 9.72.5

नृबा॒हुभ्यां॑ चोदि॒तो धार॑या सु॒तो॑ऽनुष्व॒धं प॑वते॒ सोम॑ इन्द्र ते । आप्राः॒ क्रतू॒न्सम॑जैरध्व॒रे म॒तीर्वेर्न द्रु॒षच्च॒म्वो॒३॒॑रास॑द॒द्धरिः॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.72.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! यज्ञकर्म के नेता मनुष्यों द्वारा प्रेरित एवं धारा के रूप में निचुड़ने वाले सोम तुम्हारा बल बढ़ाने के लिए आते हैं. तुम सोमरस पीकर यज्ञकर्मो को पूरा करते हो. तुमने यज्ञ में शत्रुओं को भली-भांति जीता है. हरे रंग वाले सोम चमू नामक पात्रों में इस प्रकार बैठते हैं, जिस प्रकार पक्षी वृक्ष पर बैठते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra! The leader of the yagnakarma, inspired by human beings and squeezed as a stream, comes to increase your strength. You complete the yajnakarma by drinking somras. You have won the enemies well in the yajna. The green-coloured Som sits in characters called Chamu in the same way as the birds sit on the tree. (5)

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