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9.81.5
उ॒भे द्यावा॑पृथि॒वी वि॑श्वमि॒न्वे अ॑र्य॒मा दे॒वो अदि॑तिर्विधा॒ता । भगो॒ नृशंस॑ उ॒र्व१॒॑न्तरि॑क्षं॒ विश्वे॑ दे॒वाः पव॑मानं जुषन्त ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.81.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सर्वव्यापक द्यावा-पृथिवी, अर्यमा देव, अदिति, विधाता, प्रशंसनीय भग, विस्तृत अंतरिक्ष एवं विश्वेदेव निचुड़ते हुए सोम का सेवन करें. (५)
EN English Translation
Consume the omnipresent Dyava-Prithivi, Aryama Dev, Aditi, Vidhata, Admirable Bhaga, Wide Space and Vishvedev. (5)