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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 84 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 84 • ऋचा / मन्त्र 5

9.84.5

Mantra ID: 9.84.5

अ॒भि त्यं गावः॒ पय॑सा पयो॒वृधं॒ सोमं॑ श्रीणन्ति म॒तिभिः॑ स्व॒र्विद॑म् । ध॒नं॒ज॒यः प॑वते॒ कृत्व्यो॒ रसो॒ विप्रः॑ क॒विः काव्ये॑ना॒ स्व॑र्चनाः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.84.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दूध बढ़ाने वाले सोम को अपने दूध से भिगोने के लिए गाएं आती हैं. सोम स्तुतियां सुनकर सब कुछ प्रदान करते हैं. कर्म करने में कुशल, रसयुक्त, मेधावी, कवि, अन्नयुक्त एवं शत्रु का धन जीतने वाले सोम यज्ञकर्म द्वारा शुद्ध होते हैं. (५)

EN English Translation

The milk grower comes to sing to soak the mon with his milk. Mon offers everything by listening to the praises. Som yajnakarmas who are skilled in doing karma, rasaukta, meritorious, poet, annayukta and winning the enemy's wealth are purified by yajnakarma. (5)

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