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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 86 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 86 • ऋचा / मन्त्र 16

9.86.16

Mantra ID: 9.86.16

प्रो अ॑यासी॒दिन्दु॒रिन्द्र॑स्य निष्कृ॒तं सखा॒ सख्यु॒र्न प्र मि॑नाति सं॒गिर॑म् । मर्य॑ इव युव॒तिभिः॒ सम॑र्षति॒ सोमः॑ क॒लशे॑ श॒तया॑म्ना प॒था ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.86.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम इंद्र के पेट में जाते हैं. मित्र होने के कारण सोम इंद्र के उदर को कष्ट नहीं पहुंचाते. पुरुष जिस प्रकार युवतियों से मिलते हैं, उसी प्रकार सोम जल में मिलते हैं एवं सौ छेदों वाले दशापवित्र के मार्ग से कलश में जाते हैं. (१६)

EN English Translation

Mon goes into Indra's stomach. Being a friend, Som does not disturb Indra's stomach. Just as men meet young women, so do they meet in som water and go to the kalash by the way of dashapavittra with hundred holes. (16)

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